Yakshini Mantra


स्वर्णावती यक्षिणी मंत्र साधना

yakshini mantra

 

यक्षिणी एक दिव्य और अलौकिक कृति है जिसका स्वरुप और गुण कई अर्थों में अप्सरा से मिलता जुलता है | दोनों ही अत्याधिक सुन्दर, मनमोहक और ऐश्वर्ययुक्त हैं | विशेष जाति का प्रतिनिधित्व करती हैं | देवताओं के कोषाध्यक्ष कुबेर हैं जो की यक्ष जाति का प्रतिनिधित्व करते हैं | यक्ष और यक्षिणियों के पास अत्याधिक ऐश्वर्या, वस्त्रसुवर्ण और संपत्ति होती है |

 

Yakshini is a divine and supernatural entity which resemble the Apsara in many ways. Both are very beautiful, charming, opulent and represents a particular caste. The treasurer of the deities is Kubera who represents the Yaksha caste. Yakshas and Yakshinis possess a lot of gems, jewellery, clothes, gold and property.

 

यक्षिणी के प्रकार

Yaksini Forms

 

उड्डामहेश्वर तंत्र में कुल 36 का वर्णन है जो अद्वितीय हैं और प्रत्येक में भिन्न भिन्न प्रकार के गुण और स्वभाव हैं | इन 36 यक्षिणियों ले नाम क्रमशः विचित्रा, विभ्रमाहंसी, विशालाभीषणी, जनरञ्जिका,  मदना, घंटा, कलकर्णी,  महाभया,  माहेन्द्रीशङ्खिनी, चन्द्रिणि, शमशाना, वट यक्षिणी, मेखला, विखला, लक्ष्मी, मालिनीशतपत्रिका, सुलोचना, शोभा, कपालिनी, वरयक्षिणी, नटी, कामदा, स्वर्णप्रभा, कामेश्वरीऐश्वर्या, मनोहारा, प्रमोदा,अनुरागिनी, नखेशिभामिनि, पद्मिनीस्वर्णावती और रतिप्रिया हैं |

 

In Udmaheshwar Tantra, there are a total of 36 descriptions of Yoginis  which are unique and each has different type and qualities. The names of these 36 Yakshanis are Vichitra, Vibhrama, Hansi, Vishala, Bhishni, Jananjika, Madana, Ghanta, Kalkarni, Mahabhaya, Mahendri, Shankhini, Chandrani, Shamshana, Vat Yaksini, Mekhala, Vikhla, Lakshmi, Malini, Shatapatrika, Sulochana, Sulochana , Kapalini, Varayaksini, Nati, Kamada, Swarnaprabha, Kameshwari, Aishwarya, Manohara, Pramoda, Anuragini, Nakheshi, Bamini, Padmini, Swarnavati and Ratipriya.

 

इन सभी की साधना का विधान अलग अलग है और इनकी सिद्धि का फल भी अलग ही मिलता है | यह साधना स्वर्णप्रभा यक्षिणी से सम्बंधित है जो समस्त प्रकार के भोग, धन, ऐश्वर्या और सम्पदा प्रदान करने में सक्षम है |

 

यक्षिणी का स्वरूप और स्वाभाव

Nature & Resemblance of Yogini

 

यक्षिणी प्राय: अत्यंत रमणीय, सौम्य और सरल स्वाभाव की होती है | निरन्तर सोलह वर्ष की यौवनवती सुंदरी के रूप में सुन्दर वस्त्रों में सुसज्जित रहती है | के दिव्य शरीर से एक अपूर्व सुगंध निकलती रहती है जो किसी भी देवता, यक्ष, किन्नर और पुरुष को सम्मोहित करने के लिए पर्याप्त है | यक्षिणी सिद्ध होने पर साधक का मनोवांछित कार्य करने में सदैव तत्पर रहती हैं | साधक के जीवन में प्रेमिका के रूप में बनी रहती है और साधक को निरंतर धन, ऐश्वर्या और सुख प्रदान करती है | 

 

Yakshini is usually very delightful, gentle and simple in nature. As a young girl of sixteen years, she is constantly dressed in beautiful clothes. A unique aroma continues to emanate from her divine body, which is enough to hypnotize any deity, yaksha, kinnara and man. The Yaksini is always ready to do the desired work and remains as a lover in the life of the sadhak and provides constant wealth and happiness to the sadhak.

 

यक्षिणी साधना के लाभ

Benefits Yakshini Sadhna

  • यक्षिणी सिद्ध होने पर साधक को वृद्धावस्था व्याप्त नहीं होती| साधक यक्षिणी के प्रभाव से निरंतर यौवनवान बना रहता है | 
  • यक्षिणी सिद्ध होने पर साधक को दृश्य और अदृश्य रूप से दिखाई देती रहती है और उसका मनचाहा कार्य कर देती है | 
  • यक्षिणी सिद्ध होने पर साधक का मुश्किल समय में मार्गदर्शन करती है और उसकी सेवा में तत्पर रहती है | 
  • यक्षिणी सिद्ध होने पर साधक की हर आज्ञा का पालन करती है | 
  • यक्षिणी सिद्ध होने पर साधक को धन,वस्त्र, सुवर्ण और मानसिक संतुष्टि प्रदान करती है | 
  • After the Siddhi of Yakshini, The sadhak does not get old. The sadhak remains youthful.
  • After the Siddhi of Yakshini, she is visible and invisibly visible to the sadhak and performs her desired task.
  • After the Siddhi of Yakshini, she guides the sadhak in difficult times and is ready to serve her.
  • After the Siddhi of Yakshini, she follows every command of the sadhak.
  • After the Siddhi of Yakshini, she provides wealth, clothing, gold and satisfaction to the sadhak.

यक्षिणी साधना का समय

Muhurta Yakshini Sadhana

यक्षिणी साधना किसी भी पूर्णिमा की रात्रि को संपन्न की जा सकती है | अपने गुरु से दीक्षा प्राप्त कर ही इस साधना को संपन्न करने की चेष्टा करें |

 जब तक सिद्धि न हो जाय प्रत्येक पूर्णिमा को इस साधना को संपन्न करते रहना चाहिए |एक साधक को केवल इस साधना को तभी करना चाहिए यदि उसने कोई अन्य साधना सफलतापूर्वक की है

या उच्च स्तर की साधना का पालन कर रहा है। अप्सरा साधना को केवल गुरु दीक्षा और यक्षिणी दीक्षा प्राप्त करने के बाद ही करना चाहिए।

Yakshini Sadhana can be performed on any full moon night. Try to complete this sadhan only after getting initiation from a competent Guru.

The Sadhak should keep performing this sadhana every full moon night until it is attained. A seeker should do this sadhana only if he has successfully done other spiritual sadhanas successfully and is a advanced sadhak.Yakshini Sadha na should be done only after attaining Guru Diksha and Yakshini Diksha.

यक्षिणी साधना कैसे की जाए

Rules Yakshini Sadhana

  • यह यक्षिणी साधना रात में 11:00 बजे के बाद ही की जा सकती है और यह 7 दिनों की साधना है।
  • इस साधना को करते हुए, आप कोई नौकरी या व्यवसाय नहीं कर सकते। साधक को अकेले रहना पड़ता है हालांकि वह अपने परिवार में रह सकता है।
  • बाहरी दुनिया के साथ बातचीत न्यूनतम होनी चाहिए।
  • इन सात दिनों में साधक को 1 समय ही भोजन करना है | 
  • साधक को प्रतिदिन आकर्षक पोशाक या धोती-कुर्ता पहनना चाहिए। साधक इस साधना में किसी भी प्रकार की पोशाक पहन सकता है।
  • अपने पास जलपात्र, कुंकुम, केसर और चावल रखें | 
  • अपने पास नित्य पुष्पों की माला रखें | 
  • साधक किसी स्टील की थाली में स्वस्तिक बना का उस पर यक्षिणी गुटिका रखें | 
  • उस गुटिका के ऊपर कुमकुम, केसर और चावल चढ़ा दे | 
  • उस गुटिका पैर थोड़ा सा इत्र लगा दें | 
  • उत्तर दिशा की और मुंह कर के बैठे| 
  • साधना की सफलता के लिए गुरु की पूजा करें और गुरु मंत्र के 1 माला का जाप करें।
  • यक्षिणी माला से 21 माला यक्षिणी मंत्र का निरंतर जाप करें |
  • मंत्रों को पूरा करने के बाद साधक एक अच्छी तरह से सजाए गए फर्श या चटाई बिछाकर सो सकते हैं।
  • रात को मंत्र जाप पूरा करें। साधक को कुछ अनुभव हो सकते हैं और भले ही यक्षिणी प्रकट हो, 21 माला का जाप करते रहें।
  • पूरा होने के बाद, यक्षिणी से वादा करें कि वह आपकी प्रेयसी है या आपकी बहन की तरह है या आपकी माँ की तरह है।
  • यह वचन दिया जाना चाहिए कि यक्षिणी मंत्र का 1 माला जप करने के बाद उसे अपनी पूर्ण यौवन में प्रकट रहना चाहिए और दैनिक जीवन के लिए साधक को भोजन और हर आवश्यक वस्तु प्रदान करते रहना चाहिए।
  • साधना पूर्ण होने के बाद वो गुटिका अपने गले में धारण कर लें | 
  • This Yakshini Sadhana can be done only after 11:00 pm at night and it is a 7 days spiritual practice.
  • While doing this sadhana, you cannot do any job or occupation. The seeker has to live alone although he can live with his family.
  • Interaction with the outside world should be minimal.
  • In these seven days, the seeker has to consume only one meal.
  • The seeker should wear attractive dress or dhoti-kurta daily. The seeker can wear any type of attire in this sadhana.
  • Keep water, kunkum, saffron and rice with you.
  • Keep a garland of any flowers with you.
  • The seeker should draw swastika on a steel plate and should place Yaksini Gutika on it.
  • Offer kumkum, saffron and rice over that Yakshini Gutika.
  • Apply a little perfume to that Yakshini Gutika.
  • Sit facing north.
  • For the success of Sadhana, worship the Guru and chant 1 Mala of Guru Mantra.
  • Constantly recite the 21 Mala of Yakshini Mantra with the Energized Yakshini Mala.
  • After completing the mantras the seeker can sleep on a well decorated floor or mat.
  • Complete the mantra chanting at night. The seeker may have some experience and even if Yaksini appears, keep on chanting 21 Malas.
  • After completion, a promise should be made from Yakshini that she will be your beloved or like your sister or like your mother.

It should be promised that after chanting 1 rosary of the Yaksini mantra, she should appear in his full youth and continue to provide food and every necessary thing to the seeker for daily life. After completion of spiritual practice, put the Yakshini Gutika around your neck.

यक्षिणी मंत्र

Yakshini Mantra

ॐ ऐं श्रीं ह्रीं दिव्यांगना आगच्छ सिद्धिं देहि देहि फट |

Om Aing Shreeng Hreeng Divyangana Aagachch Siddhim Dehi Dehi Phat


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Published on Mar 27th, 2020


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