How to Know Kuldevi Kuldevta


कुलदेवी या कुलदेवता जानने का मंत्र 

 

Kuldevi Kuldevta Mantraकुलदेवी या कुलदेवता साधना जिनकी कृपा से कुल परिवार में शांति एवं सम्पन्नता आती है | कुलदेवी या कुलदेवता सारे परिवार की रक्षा करते हैं और आने वाले संकटों को हटा देते हैं | इस लिए किसी भी शुभ कार्य के प्रारम्भ में कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा की जाती है | कुलदेवी या कुलदेवता साधना करने से परिवार में पितृ दोष भी समाप्त हो जाता है | 

 

Kuladevi or Kuladevata Sadhana grace brings peace and prosperity in the family. Kuladevi or Kuladevata protects the whole family and removes the coming troubles. Therefore, Kuladevi or Kuladevata is worshiped at the beginning of any auspicious task. Pitra dosha in the family is also eliminated by performing Kuladevi or Kuladevata Sadhana.

 

कुलदेवी या कुलदेवता की पूजा साधना अनेक रूपों में  प्रत्येक परिवार या कुल में प्रचलित रही है | अलग- अलग कुलों में अलग- अलग कुलदेवता और कुलदेवियाँ हैं जैसे कि चंडी, गहिल, काली बानी, यशस्वी देवी, स्वी देवी, बीजासन देवी, नथिय, बैराठाँ देवी, काला पीर, रेडका माता, चीची माता, काले बुबे, हरी देवता, माँ शीतला, कमला बाई, चन्दन बाला, बेरी वाला माँ, चित्रगुप्त, हरदौल बाबा,हिडिम्बा, दूल्हा बाबा और भैरवा बाबा इत्यादि | 

 

Worship of Kuladevi or Kuladevata has been practiced in many forms in every family or clan. Different clans have different Kuladevata and Kuladevis such as Chandi, Gahil, Kali Bani, Yashaswi Devi, Svi Devi, Bijasan Devi, Nathiya, Barathan Devi, Kala Pir, Redka Mata, Chichi Mata, Kale Bube, Hari Devta, Maa Sheetla, Kamla Bai, Chandan Bala, Ma Berry, Chitragupta, Hardaul Baba, Hidimba, Dulha Baba and Bhairava Baba etc.

कुलदेवी या कुलदेवता का अर्थ है 'कुल' या पारिवारिक वंश का देवता। ये आमतौर पर ऐसे मंदिर हैं जहां परिवार पीढ़ियों से भगवान की पूजा करता आ रहा है, और अपने कुल के इतिहास टटोलने से इसका मुख्य मंदिर होने का पता लगा सकता है। अलग-अलग परिवारों में अलग-अलग मंदिर अपने परिवार के कुलदेवता हैं |


Kuladevi or Kuladevata means 'Kul' or the god of family descent. These are usually temples where the family has been worshiping Kuldevi or Kuldevta for generations, and by tracing the history of its clan, one can find out its main temple. Different temples in different families are the Kuldevi or Kuldevta of their families.

 

भगवान् राम की कुलदेवी अयोध्या नगरी में  देवकाली थी|  रावण की लंका में निकुंबला थी|  भगवान् कृष्ण की कुलदेवी हरषिदी गांधवी में थी | प्रत्येक योद्धा युद्ध से पहले कुलदेवी या कुलदेवता का पूजन कर उनका आशीर्वाद लेते थे | 


Kuldevi of Lord Rama was Devkali in the city of Ayodhya. Kuldevi of Ravana was Nikumbala in Lanka. Kuldevi of Lord Krishna was Harshadi in Gandhavi. Every warrior worshiped Kuldevi or Kuldevta before the war and took their blessings.

 

प्रत्येक साधक, राजा या महान व्यक्ति अपने जीवन में सुख, समृद्धि और विजय प्राप्ति के लिए कुलदेवी या कुलदेवता को प्रसन्न करता था| जिस प्रकार माँ-बाप स्वत: ही अपने पुत्र-पुत्रियों के लिए चिंतित रहते हैं , उसी प्रकार कुलदेवी या कुलदेवता अपने कुल के सभी मनुष्यों  पर कृपा करने के लिए तत्पर रहते हैं| जब कुल के जीव उन्नति करते हैं तो उन्हें अभूतपूर्व आनंद प्राप्त होता है| 

 

Every sadhak, king or great person used to please Kuladevi or Kuladevata for happiness, prosperity and victory in their life. Just as parents automatically feel concerned about their sons and daughters, similarly Kuladevi or Kuladevata is ready to be kind to all the people of his family. When the members of the family progress, Kuladevi or Kuladevata get unprecedented pleasure.

 

मूलरूप से कुलदेवी या कुलदेवता अपनी कृपा बरसाने को तैयार रहते हैं, किन्तु देवयोनि में होने के कारण बिना मांगे स्वत: देना उनके लिए उचित नहीं होता है | परन्तु यह देने की क्रिया तभी प्रारम्भ होती है जब साधक कुलदेवी या कुलदेवता से मांग करता है | वर्तमान समय में यह प्रथा धीरे-धीरे लुप्तप्राय: होती जा रही है |

 

Basically, Kuldevi or Kuldevata are ready to show their blessings, but due to being in Devayoni, it is not appropriate for them to give boons automatically without worshipping. But this giving process starts only when the sadhak asks for it from Kuladevi or Kuladevata. At present, this practice is gradually becoming endangered.

 

How To Do Kuladevi Kuladevta Mantra Sadhana

 

  • इस साधना से कुलदेवी या कुलदेवता को प्रसन्न किया जाता है| निश्चय ही इस साधना से कुलदेवी या कुलदेवता की कृपा प्राप्त होती है और जीवन संवर जाता है |
  • यह 15 दिन की  की साधना है जिसे किसी भी अमावस्या तिथि से प्रारम्भ किया जा सकता है |
  • प्रातः अथवा रात्रि में स्नान कर पूर्व की और मुंह कर कर बैठें | 
  • अपने गुरु का पूजन करें | 
  • अपने सामने घी का दीपक जलाएं | 
  •  
  • अपने दाहिने हाथ में जल लेकर संकल्प करें कि मैं अपने कुल देवता की प्रसन्नता के लिए यह साधना संपन्न कर रहा हैं | 
  • प्रार्थना करें कि कुल देवता मुझे जीवन में हर प्रकार की सफलता और समृद्धि प्रदान करें | स्वस्थ्य और सुख शांति प्रदान करें | 
  • प्रार्थना करें कि कुल देवता जीवन में आने वाली सभी विपत्तियों और रोगों को दूर करें |
  •  
  • अपने सामने भोज पत्र पर अष्टगंध से "कुलदेवता लिखें" और उसे पुष्प के आसन पर रखें | 
  • उसके ऊपर कुंकुम,अक्षत एवं नैवैद्य चढ़ाएं | भोजपत्र पर कुमकुम से पांच बिंदी लगाएं | 
  • इसके बाद प्राण प्रतिष्ठित स्फटिक माला व प्राण प्रतिष्ठित पारद माला से निम्न मंत्र की 21 माला नित्य 15 दिन तक करें | 

 

  • This is 15-day spiritual practice that can be started from any Amavasya or no-moon day.
  • Take a bath in the morning or at night and sit facing east.
  • Worship your Guru.
  • Light a lamp of ghee in front of you.
  •  
  • With water in your right hand, resolve or take Sankalp that I am doing this sadhana for the happiness of my family deity.
  • Pray that the Kuladevi Kuladevta give me all kinds of success and prosperity in life. Provide health happiness andpeace.
  • Pray that the Kuladevi Kuladevta should remove all the troubles and diseases in life.
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  • "Write the word Kuladevi or Kuladevta" on the bhojpatra or paper with ashtgandha.
  • Offer Kunkum, rice and Naivedya(prasad) on it. Apply five dots with Kumkum on the bhojpatra.
  • After this, make 21 rounds of the following Mantra daily for 15 days with the Energized Parad Mala or with the Energized Spahtik mala.

 

Kuladevi Kuladevta Sadahan Sankalp

कुलदेवी या कुलदेवता साधना संकल्प  

 

ॐ अद्य अमुक गोत्रीय (अपना गोत्र बोलें ), अमुक ( शर्मा ाहम (अपना नाम बोलें) स्व कुलदेवता प्रीत्यर्थं सकल मनोकामना पूर्तिं निमित्तं कुलदेवता साधना सम्पत्यसे | 

Om Adya Amuk Gotryia ( Say Your Gotra), Amuk Sharmaaham ( say your name ) Swa Kuldevta Preetyartham Sakal Manokamna Poortim Nimittam Kuldevta Sadhana Sampatyse 

 

Kuladevi Kuladevta Mantra

 

ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं कुलदेवतायै मनोवाञ्छितं साधय साधय फट|

Om Hreem Shreem Kreem Kuldevtayee Manovanchitam Sadhay Sadhay Phat

 

  • अंतिम दिन भोजपत्र के समक्ष घर का बना हुआ नैवैद्य अर्पित करें |
  • साधना पूर्ण होने के पश्चात् उस भोजपत्र को किसी वस्त्र में लपेट कर सरोवर या नदी में प्रवाहित कर दें |
  • शीघ्र ही साधना के परिणाम आने शुरू हो जाते है |
  • और अगर कुलदेवी या कुलदेवता का पता नहीं हो तो कुछ ही दिनों में उनके दर्शन स्वपन्न में प्राप्त हो जाते हैं अथवा उनके बारे में जानकारी मिल जाती है | 

 

  • On the last day, offer homemade naivedya(prasad) in front of the bhojpatra.
  • After completion of spiritual practice, wrap the bhojpatra in a cloth and throw it into the lake or river.
  • Soon the results of spiritual practice start coming.
  • And if Kuldevi or Kuldevata is not known, then within a few days you will get the darshans in the dream or some information about them becomes known.

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Published on Mar 24th, 2020


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