Five Best Uses of Shree Hanuman Chalisa


श्री  हनुमान चालीसा

hanuman chalisa

 

Hanuman Chalisa is a divine tale of a feisty warrior, Lord Hanuman. Hanuman Chalisa is one of the greatest & powerful shabar mantra to remove the obstacles & troubles in life. Practice or listen Hanuman Chalisa everyday to remove black magic, ghosts problems and evil-eye. Other than general protection, Hanuman Chalisa also has other aspects which any person can use in life to get the maximum benefit in life.

 

Hanuman Chalisa is already a Siddh Shabar mantra but one can magnify its positive effects by reading it 11 times on every solar or lunar eclipse and other important Hindu festivals like Deepawali, Holi, Ram Navami, Hanuman Jayanti etc.

 

Five Best Uses of Hanuman Chalisa

  1. Remove Black Magic & Evil Eye - Chant 11 times and sprinkle the water in the home to remove the black magic & evil eye.
  2. Remove fear & depression -  Remove fear & depression in life by chanting Hanuman Chalisa once after taking bath & before going to sleep.
  3. Remove the Malefic Effects of planets- Chant Hanuman Chalisa 5 times daily in the morning before sunrise to remove malefic effects of planets especially planet saturn.
  4. Remove Diseases - Take some water and after chanting 4 times of Hanuman Chalisa, blow your breath on this water and give this water to the sick person to remove sickness and even pain.
  5. Remove Court Cases - Practice  Hanuman Chalisa 7 times  to remove the negative aspects of the court case and to free the genuine culprit in the prison.

Shree Hanuman Chalisa Text

श्रीगुरु चरन सरोज रज निज मनु मुकुरु सुधारि।
बरनऊँ रघुबर बिमल जसु जो दायकु फल चारि॥
बुद्धिहीन तनु जानिके सुमिरौं पवनकुमार।
 बल बुद्धि बिद्या देहु मोहिं हरहु कलेस बिकार॥

 

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर।
 जय कपीस तिहुँ लोक उजागर॥
राम दूत अतुलित बल धामा।
 अंजनिपुत्र पवनसुत नामा॥

महाबीर बिक्रम बजरंगी।
कुमति निवार सुमति के संगी॥
कंचन बरन बिराज सुबेसा।
कानन कुंडल कुंचित केसा॥

हाथ बज्र औ ध्वजा बिराजै।
काँधे मूँज जनेऊ साजै॥
संकर सुवन केसरीनंदन।
 तेज प्रताप महा जग बंदन॥

विद्यावान गुणी अति चातुर।
राम काज करिबे को आतुर॥
 प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया।
राम लखन सीता मन बसिया॥

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा।
बिकट रूप धरि लंक जरावा॥
भीम रूप धरि असुर सँहारे।
रामचंद्र के काज सँवारे॥

लाय सजीवन लखन जियाये।
श्रीरघुबीर हरषि उर लाये॥
 रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई।
तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई॥

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं।
 अस कहि श्रीपति कंठ लगावैं॥
 सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा।
 नारद सारद सहित अहीसा॥

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते।
कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते॥
तुम उपकार सुग्रीवहिं कीन्हा।
 राम मिलाय राज पद दीन्हा॥

तुम्हरो मंत्र बिभीषन माना।
लंकेश्वर भए सब जग जाना॥
 जुग सहस्त्र जोजन पर भानू।
लील्यो ताहि मधुर फल जानू॥

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं।
 जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं॥
 दुर्गम काज जगत के जेते।
सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते॥ ।

राम दुआरे तुम रखवारे।
 होत न आज्ञा बिनु पैसारे॥
 सब सुख लहै तुम्हारी सरना।
तुम रच्छक काहू को डर ना॥

आपन तेज सम्हारो आपै।
 तीनों लोक हाँक तें काँपै॥
भूत पिसाच निकट नहिं आवै।
महाबीर जब नाम सुनावै॥

नासै रोग हरै सब पीरा।
 जपत निरंतर हनुमत बीरा॥
संकट तें हनुमान छुड़ावै।
मन क्रम बचन ध्यान जो लावै॥

सब पर राम तपस्वी राजा।
तिन के काज सकल तुम साजा॥
 और मनोरथ जो कोई लावै।
 सोइ अमित जीवन फल पावै॥

चारों जुग परताप तुम्हारा।
 है परसिद्ध जगत उजियारा॥
साधु संत के तुम रखवारे।
असुर निकंदन राम दुलारे॥

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता।
 अस बर दीन जानकी माता॥
 राम रसायन तुम्हरे पासा।
सदा रहो रघुपति के दासा॥

तुम्हरे भजन राम को पावै।
जनम जनम के दुख बिसरावै॥
अंत काल रघुबर पुर जाई।
जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई॥

और देवता चित्त न धरई।
 हनुमत सेई सर्ब सुख करई॥
संकट कटै मिटै सब पीरा॥
 जो सुमिरै हनुमत बलबीरा॥

जै जै जै हनुमान गोसांई।
 कृपा करहु गुरु देव की नांई॥
जो सत बार पाठ कर कोई।
 छूटहि बंदि महा सुख होई॥

जो यह पढ़ै हनुमान चलीसा।
 होय सिद्धि साखी गौरीसा॥
 तुलसीदास सदा हरि चेरा।
 कीजै नाथ हृदय मँह डेरा॥

पवनतनय संकट हरन मंगल मूरति रूप।
राम लखन सीता सहित हृदय बसहु सुर भूप॥


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Published on Mar 2nd, 2014


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